मिसाइलें और ड्रोन जब अबू धाबी के शांत आसमान को चीरते हुए नीचे गिरे, तो दुनिया दंग रह गई। ये हमला सिर्फ एक देश पर नहीं था। इसने उस भरोसे को हिला दिया कि यूएई जैसे सुरक्षित ठिकाने जंग से कोसों दूर हैं। ईरान समर्थित हूतियों ने यूएई पर भीषण हमला किया है, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल हुआ। इस हमले की आग में तीन भारतीय नागरिकों की जान जाने और कई के घायल होने की खबर ने भारत में भी खतरे की घंटी बजा दी है।
हमले की भीषण हकीकत और भारतीयों पर असर
अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के स्टोरेज टैंकों के पास जो विस्फोट हुए, वे कोई मामूली हादसा नहीं थे। हूतियों ने साफ कर दिया कि उनकी पहुंच अब यमन की सीमाओं से बहुत आगे निकल चुकी है। इस हमले में तीन लोगों की मौत हुई, जिनमें दो भारतीय नागरिक और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे। यह पहली बार नहीं है जब खाड़ी में तनाव बढ़ा है, पर इस बार निशाना नागरिक ठिकाने थे।
जब हम इन हमलों को देखते हैं, तो ये साफ नजर आता है कि हमलावर अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे आर्थिक रीढ़ पर चोट कर रहे हैं। तीन भारतीयों के घायल होने और दो की मौत ने नई दिल्ली के विदेश मंत्रालय को सक्रिय कर दिया है। यूएई में करीब 35 लाख भारतीय रहते हैं। उनकी सुरक्षा अब केवल एक कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट बन चुका है।
हूतियों के पास इतनी ताकत कहां से आई
ये सोचना बचकाना होगा कि यमन के पहाड़ों में लड़ रहे विद्रोही अचानक से इतने सटीक ड्रोन और मिसाइलें बनाने लगे। एक्सपर्ट्स जानते हैं कि इन ड्रोनों और मिसाइलों के पीछे किसका हाथ है। ईरान पर अक्सर इन समूहों को हथियार सप्लाई करने के आरोप लगते रहे हैं। हूतियों ने इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन यमन स्टॉर्म' का नाम दिया। उन्होंने जुल्फिकार बैलिस्टिक मिसाइलों और समद-3 जैसे लंबी दूरी के ड्रोनों का उपयोग किया।
ईरान इस पूरे खेल में खुद को सीधे तौर पर शामिल नहीं दिखाता। वो अपने प्रॉक्सी समूहों का इस्तेमाल करता है। यूएई ने हाल के वर्षों में यमन युद्ध में अपनी सक्रियता कम की थी, लेकिन वह अभी भी उन समूहों का समर्थन कर रहा है जो हूतियों के खिलाफ लड़ रहे हैं। इसी खुन्नस ने अबू धाबी को एक जंग का मैदान बना दिया।
क्यों बदला हमले का तरीका
- हूतियों को लगा कि यूएई को डराकर वे उसे यमन से पूरी तरह बाहर कर सकते हैं।
- ड्रोन तकनीक सस्ती और प्रभावी है। इसे राडार पर पकड़ना मुश्किल होता है।
- आर्थिक नुकसान पहुंचाकर वे यूएई की छवि एक 'सुरक्षित निवेश केंद्र' के रूप में खराब करना चाहते हैं।
भारत के लिए ये सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है
भारत इस हमले को हल्के में नहीं ले सकता। हमारी ऊर्जा सुरक्षा और रेमिटेंस (प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजा गया पैसा) का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। अगर यूएई में अस्थिरता आती है, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
ईरान और भारत के रिश्ते काफी पुराने हैं, लेकिन जब भारतीय नागरिकों का खून बहता है, तो कूटनीति की मेज पर तेवर बदलने पड़ते हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस हमले की कड़ी निंदा की है। हमें यह समझना होगा कि मिडिल ईस्ट की ये आग अब सिर्फ वहां तक सीमित नहीं रहेगी।
सुरक्षा के नए समीकरण
खाड़ी देश अब अपनी रक्षा प्रणालियों पर भारी निवेश कर रहे हैं। अमेरिका का 'थाड' (THAAD) सिस्टम और 'पैट्रियट' मिसाइल डिफेंस अब और भी सक्रिय किए जा रहे हैं। लेकिन क्या ये काफी हैं? ड्रोन स्वार्मिंग (एक साथ कई ड्रोनों का हमला) ऐसी तकनीक है जिसके सामने महंगे डिफेंस सिस्टम भी कभी-कभी फेल हो जाते हैं।
आगे का रास्ता क्या है
अब सवाल ये उठता है कि क्या ये हमले रुकेंगे? सच कहूं तो स्थिति अभी और बिगड़ने वाली है। हूतियों ने चेतावनी दी है कि वे और भी नागरिक ठिकानों और एयरपोर्ट्स को निशाना बना सकते हैं। यूएई ने जवाबी कार्रवाई में यमन के सना में हवाई हमले किए हैं, जिससे तनाव चरम पर है।
अगर आप यूएई में रह रहे हैं या वहां जाने की सोच रहे हैं, तो इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है। स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा चेतावनियों को गंभीरता से लें। भारतीय दूतावास के संपर्क सूत्रों को अपने पास रखें। कूटनीतिक स्तर पर भारत को ईरान और सऊदी अरब दोनों के साथ अपने प्रभाव का इस्तेमाल करना होगा ताकि ये छद्म युद्ध और मासूमों की जान न ले।
हकीकत ये है कि जब तक यमन की जंग का कोई राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक मिडिल ईस्ट का आसमान बारूद की गंध से भरा रहेगा। इस हमले ने साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध अब सीमाओं का मोहताज नहीं है।