होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की बारूदी सुरंगों ने कैसे दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की बारूदी सुरंगों ने कैसे दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का वो गला है जिसे अगर थोड़ा भी दबाया जाए तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था का दम घुटने लगता है। अभी जो हालात दिख रहे हैं, वो बेहद डरावने हैं। ईरान ने समुद्र के नीचे जो बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछाई हैं, उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों की नींद उड़ा दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर तनाव ऐसे ही जारी रहा तो होर्मुज 6 महीने तक बंद रह सकता है। ये सिर्फ एक कूटनीतिक बयान नहीं है, बल्कि एक कड़वी हकीकत है जिसे हमें समझना होगा।

तेल की कीमतें आसमान छूने वाली हैं और इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने वाला है। जब समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछ जाती हैं, तो उन्हें हटाना बच्चों का खेल नहीं होता। इसमें हफ्तों नहीं, बल्कि महीनों लग जाते हैं। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि इन माइन्स को साफ करने में लंबा वक्त लगेगा। इसका मतलब है कि दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल वहीं फंसा रह जाएगा।

समुद्र के नीचे ईरान का बिछाया मौत का जाल

ईरान की सैन्य रणनीति हमेशा से 'असममित युद्ध' (Asymmetric Warfare) पर टिकी रही है। उनके पास अमेरिका जैसे बड़े विमानवाहक पोत नहीं हैं, पर उनके पास हजारों ऐसी खामोश बारूदी सुरंगें हैं जो किसी भी आधुनिक जहाज को पल भर में राख कर सकती हैं। ये माइन्स समुद्र की सतह के नीचे छिपी होती हैं और जैसे ही कोई बड़ा जहाज इनके संपर्क में आता है या इनके पास से गुजरता है, ये फट जाती हैं।

अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के सूत्रों की मानें तो ईरान ने आधुनिक 'स्मार्ट माइन्स' का इस्तेमाल किया है। ये पुरानी सुरंगों जैसी नहीं हैं जो बस टकराने पर फटती थीं। ये ध्वनिक (Acoustic) और चुंबकीय (Magnetic) सेंसर से लैस होती हैं। यानी जहाज की आवाज या उसके लोहे की मौजूदगी भांपकर ये खुद-ब-खुद सक्रिय हो जाती हैं। अमेरिका के पास 'माइन स्वीपर' जहाज तो हैं, लेकिन ईरान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वहां ऑपरेशन चलाना जान जोखिम में डालने जैसा है।

6 महीने की पाबंदी और वैश्विक हाहाकार

सोचिए अगर आधा साल दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते से एक भी जहाज न गुजरे तो क्या होगा? होर्मुज के रास्ते हर दिन लगभग 21 मिलियन बैरल तेल निकलता है। अगर ये रास्ता बंद हुआ, तो भारत जैसे देशों के लिए स्थिति भयावह हो जाएगी। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल मिडिल ईस्ट से मंगाता है।

पेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि बारूदी सुरंगों को ढूंढना घास के ढेर में सुई ढूंढने जैसा है। एक बार सुरंग बिछ जाने के बाद, पूरे इलाके को सुरक्षित घोषित करने के लिए हर इंच की जांच करनी पड़ती है। इसमें रोबोटिक सबमरीन और गोताखोरों की मदद ली जाती है। लेकिन अगर ईरान की नौसेना ड्रोन हमलों से इस सफाई अभियान में बाधा डालती है, तो 6 महीने का समय भी कम पड़ सकता है।

ईरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ या उसके तेल निर्यात को रोका गया, तो वो इस रास्ते को बंद कर देगा। ये उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वो जानते हैं कि वो सीधे युद्ध में अमेरिका को नहीं हरा सकते, लेकिन वो दुनिया को आर्थिक रूप से पंगु जरूर बना सकते हैं।

अमेरिकी माइन स्वीपिंग तकनीक की सीमाएं

अमेरिका की नौसेना दुनिया में सबसे ताकतवर मानी जाती है, लेकिन माइन वारफेयर में उसकी स्थिति थोड़ी नाजुक है। उनके पास 'एवेंजर्स क्लास' (Avenger-class) के कुछ ही पुराने जहाज बचे हैं जो माइन्स को साफ कर सकते हैं। हालांकि, वो अब 'लिटोरल कॉम्बैट शिप' (LCS) और मानवरहित ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, पर तकनीक की भी अपनी सीमाएं होती हैं।

  1. छिपी हुई सुरंगें: कुछ माइन्स समुद्र की तलहटी में दब जाती हैं, जिन्हें सोनार से पकड़ना लगभग नामुमकिन होता है।
  2. धोखा देने वाली तकनीक: ईरान ऐसी डमी माइन्स भी बिछाता है जो असली लगती हैं। इससे सफाई करने वाली टीम का समय बर्बाद होता है।
  3. मौसम का मिजाज: होर्मुज में समुद्र की लहरें और करंट काफी तेज होते हैं, जो इन सुरंगों को अपनी जगह से हिला देते हैं। आज जहां सुरंग मिली, कल वो वहां नहीं होगी।

इन्हीं वजहों से अमेरिकी नौसेना के रणनीतिकारों का मानना है कि इस पूरे इलाके को पूरी तरह सुरक्षित करने में कम से कम 6 महीने लगेंगे। तब तक कोई भी कमर्शियल शिपिंग कंपनी अपने जहाजों को वहां भेजने का जोखिम नहीं उठाएगी। इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे रास्तों के लिए प्रीमियम इतना बढ़ा देती हैं कि व्यापार करना घाटे का सौदा हो जाता है।

भारत पर इसका सीधा असर

भारत के लिए ये किसी बुरे सपने जैसा है। हमारी ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण रास्ते से होकर आता है। अगर होर्मुज बंद होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रातों-रात 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। इसका मतलब है हर चीज की महंगाई। माल ढुलाई महंगी होगी, तो सब्जियां और अनाज भी महंगे होंगे।

भारतीय नौसेना ने पहले भी 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत अपने युद्धपोतों को खाड़ी क्षेत्र में तैनात किया है ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षा दी जा सके। लेकिन बारूदी सुरंगों के खिलाफ युद्धपोत भी बेबस हो जाते हैं। हमें अब अपनी स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) पर निर्भर रहना होगा, जो बहुत लंबे समय तक साथ नहीं दे पाएंगे।

ईरान का ये कदम सिर्फ अमेरिका को चुनौती देना नहीं है, बल्कि ये पूरी दुनिया के खिलाफ एक आर्थिक युद्ध है। जब अमेरिका कहता है कि इसमें समय लगेगा, तो वो दरअसल दुनिया को एक बड़े आर्थिक झटके के लिए तैयार रहने का इशारा कर रहा है।

आगे क्या करना चाहिए

अगर आप निवेशक हैं या वैश्विक राजनीति पर नजर रखते हैं, तो आने वाले कुछ महीने बहुत अस्थिर रहने वाले हैं। तेल और गैस से जुड़े स्टॉक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। सरकारों को अब वैकल्पिक रास्तों और ऊर्जा के दूसरे स्रोतों पर तेजी से काम करना होगा। होर्मुज का संकट हमें याद दिलाता है कि हम आज भी ऊर्जा के लिए कितने मजबूर हैं।

अपनी निवेश रणनीति में विविधता लाएं और सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों पर विचार करें क्योंकि युद्ध की आहट हमेशा शेयर बाजार को गिराती है। ऊर्जा की बचत को सिर्फ एक नारा न समझें, बल्कि इसे एक जरूरत की तरह अपनाएं। अगले कुछ हफ्तों में खाड़ी से आने वाली हर खबर पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि वहां से निकलने वाली एक चिंगारी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को स्वाहा कर सकती है।

JL

Julian Lopez

Julian Lopez is an award-winning writer whose work has appeared in leading publications. Specializes in data-driven journalism and investigative reporting.